मोहब्बतकभी हमको हंसाती है,
कभी हमको रूलाती है
जिन्हें जीना नहीं आता,
उन्हें जीना सिखाती है,
खुदा के नाम पर लिक्खी,
ये दीवानों की पाती है
मोहब्बत की नहीं जाती,
मोहब्बत खुद हो जाती है ।
खुदा के सामने दिल से इबादत कौन करता है
तिरंगा हाथ में लेकर शहादत कौन करता है
ये कसमें और वादे चार दिन में टूट जाते हैं
वो लैला और मजनूं सी मोहब्बत कौन करता है ।
जीतने में क्या मिलेगा,
जो मजा है हार मेंजिन्दगी का फलसफा है, प्यार के व्यापार मेंहम तो तन्हा थे,
हमारा नाम लेवा भी न थाइस मोहब्बत से हुआ चर्चा सरे बाजार में ।
सदा मिलने की चाहत की,
जुदा होना नहीं मांगाहमें इंसान प्यारे हैं,
खुदा होना नहीं मांगाहमेशा मंदिरो मस्जिद में, मांगा है मोहब्बत कोकभी चांदी नही मांगी, कभी सोना नहीं मांगा ।DR. SUNIL JOGI
Friday, 14 August 2015
Dr sunil jogi'poem
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